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Thursday, 28 November 2019

चेचक के लक्षण और दाग हटाने के लिए घरेलू उपचार

चिकन पॉक्स (चेचक) के लक्षण और दाग हटाने के लिए घरेलू उपचार | Chicken Pox Symptoms, Treatment and Spot Removal Home Remedies (gharelu nuskhe), chechak ke daag ka ilaj in hindi


चिकन पॉक्स एक तरह का रोग है, जो कि काफ़ी तकलीफ़ देह होता है. इसे वरिसल्ला (varicella) भी कहा जाता है. जिस व्यक्ति को यह रोग होता है, उसके शरीर पर लाल लाल फफोले हो जाते हैं, जो व्यक्ति को काफ़ी दर्द पहुंचाता है. मेडिकल की उन्नति से इसका इलाज काफ़ी संभव हो पाया है. हालाँकि दवाओं के साथ साथ कई तरफ के परहेज़ आदि करने की भी आवश्यकता होती है. यहाँ पर इस रोग के उपचार से सम्बंधित सभी आवश्यक और विशेष जानकारियां दी जायेंगीं.
चेचक के दाग स्किन में बहुत अंदर तक जुड़ जाते है, जिसे निकालना आसान नहीं होता. इनको मिटाने के लिए बहुत सी दवाइयां अब आ गई है लेकिन ये स्किन के लिए नुकसानदायी भी होती है. दवाइयों में बहुत से केमिकल होते है जो कई बार असर करने की जगह नुकसान पहुंचाते है. इस बीमारी के बाद शरीर में अवरोधक क्षमता भी कम हो जाती है, जिससे इन चेचक पर आसानी से संक्रमण हो जाता है. इस दाग को दूर करने के लिए सबसे अच्छा है कि हम आयुर्वेद का रास्ता चुने और घरेलू उपाय अपनाएं.
chicken pox chechak
चिकन पॉक्स के लक्षण (Chicken Pox Symptoms)

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चिकन पॉक्स होने के कई विशेष लक्षण हैं, जिनका विवरण नीचे दिया जा रहा है.                                      
  • चिकन पॉक्स होने का सबसे आम लक्षण ये है कि रोगी के शरीर पर खुजली युक्त रैश नज़र आने लगते हैं. रैश होने के 7 दिन से 21 दिनों के पहले से ही शरीर में इन्फेक्शन होने लगता है.
  • इसके अलावा व्यक्ति इस रोग के होने पर कमज़ोर होता चला जाता है और उसे बुखार आदि भी होते रहते हैं.
  • इस रोग में व्यक्ति का सर दर्द होना आम है.
  • धीरे धीरे शरीर में लाल फफोले हो जाते हैं, जिसमे पानी जमना शुरू हो जाता है. इन घावों से पानी निकलने लगता है और काफ़ी जलन भी होती है.
चिकन पॉक्स होने का कारण (Chicken Pox Reasons)
चिकन पॉक्स होने का सबसे बड़ा कारण है वरिसला- जोस्टर वायरस  (Varicella-zoster virus), जिसकी वजह से किसी व्यक्ति को यह रोग होता है. यह रोग छुआछूत से फैलने वाला है, अतः जिस व्यक्ति को पहले से यह रोग है, उससे कांटेक्ट होने पर भी अन्य व्यक्तियों को यह रोग हो सकता है. रोगी के शरीर पर लाल फफोले आने के 2 दिन पहले से ही यह वायरस रोगी पर हावी हुआ रहता है. चिकन पॉक्स होने पर लाल फफोलों के इर्द गिर्द यह वायरस स्थित रहते हैं, और तब तक पूरी तरह से नष्ट नहीं हो जाते, जब तक कि पूरी तरह से ये घाव सूख नहीं जाते. ध्यान देने वाली बात है कि जिस व्यक्ति को यह रोग हुआ हो, यदि उसके सामने बैठ कर बातें की जाएँ, तो भी उसकी साँस से चिकन पॉक्स फैलने के आसर होता हैं.
चिकन पॉक्स का उपचार (Chicken Pox Treatment)
चिकन पॉक्स होने के 1 या 2 सप्ताह के बाद यह अपने आप ठीक होने लगता है. इसका सीधा उपचार अभी तक नहीं आया है. यह ख़ुद ब ख़ुद ठीक होता है. हालाँकि इसका वैक्सीन ज़रूर मौजूद है, जिसे अपने बच्चों को सही समय पर दिला देना आवश्यक होता है. बच्चों को चिकन पॉक्स वैक्सीन दो बार दी जाती हैं. पहला वैक्सीन बच्चों को उसके जन्म के 12 से 15 महीनों के बीच तथा दूसरा 4 वर्ष से 6 वर्ष की उम्रावस्था के बीच दी जाती है. यह वैक्सीन काफ़ी काम करता है और लोगों में चिकन पॉक्स होने के असर को 90% तक कम कर देता है
हालाँकि इससे होने वाली परेशानियों का उपचार करना अतिआवश्यक है ताकि इससे होने वाली परेशानी कम से कम हो. इसके लक्षणों के उपचार का वर्णन निम्नलिखित है,
  • बुखार से राहत : बुखार से राहत प्राप्त करने के लिए रोगी को डॉक्टर के परामर्श से ylenol (acetaminophen) दिया जा सकता है. ध्यान रखें कि बुखार के लिये एस्पिरिन सम्बंधित दवाएं उन्हें न दिए जाये.
  • डिहाइड्रेशन से राहत : डिहाइड्रेशन से राहत के लिए रोगी को अधिक से अधिक तरल पेय देने की आवश्यकता होती है. रोगी को जितना अधिक जल पिलाया जाए उतना बेहतर होता है. बच्चों को डिहाइड्रेशन से राहत के लिए डॉक्टर की परामर्श लेकर Pedialyte दिया जा सकता है.
  • मुँह की रूचि के लिए : इस समय रोगी को कुछ भी खाने का मन नहीं करता है. मुँह में अरुचि हो जाती है. साथ ही खाना चबाने में भी काफ़ी तकलीफ़ होती है. ऐसे समय में रोगी के मुँह की रूचि बढाने के विभिन्न जायकेदार सूप बना कर दिया जा सकता है. सूप अधिक मसालेदार न हो तो बेहतर है.
  • खुजली और जलन से राहत : खुजली से राहत के लिए शरीर पर डॉक्टर से परामर्श लेकर लोशन लगाए जा सकते हैं. साथ ही रोगी को हलके कपडे ही पहनाएं. इससे शरीर के विभिन्न हिस्से में हवा लगेगी और रोगी को जलन से राहत प्राप्त हो सकती है.
चिकन पॉक्स का घरेलु उपचार (Chicken Pox Home Treatment)
चिकन पॉक्स का घरेलु उपचार निम्न तरह से किया जा सकता है.
  1. बेकिंग सोडा : बेकिंग सोडा के उपयोग से रोगी को जलन और खुजली से राहत दिलाई जा सकती है. एक ग्लास पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा डाल कर उसे अच्छे से मिला लें. इसके बाद किसी नर्म कपडे को इसमें भींगा कर घाव पर रखें. अथवा रोगी के नहाने के पानी में भी इसे मिला कर रोगी को नहलाया जा सकता है.
  2. इंडियन लीलाक (बकाइन) : इसकी सहायता से फफोलों को सूखने में मदद प्राप्त होती है. इसका एंटीवायरल गुण इस रोग के उपचार में भी काफ़ी मदद करता है. एक मुट्ठी ताज़े नीम के पत्ते लें और उसे अच्छे से पीस कर घाव पर लगाएं. इससे रोग के उपचार में मदद प्राप्त हो सकेगी.
  3. गाजर और धनिया : गाजर और धनिया द्वारा बनने वाला सूप का प्रयोग इसके उपचार के लिए किया जाता है. इन दोनों का एंटीओक्सीडेंट गुण इसके उपचार के लिए काफ़ी लाभप्रद होता हैं. 100 ग्राम गाजर और लगभग 60 ग्राम धनिया पत्ते के प्रयोग से सूप बनाएं और रोज़ इसका सेवन करें.
  4. ब्राउन विनेगर : ब्राउन विनेगर का प्रयोग इस रोग से होने वाले जलन आदि को कम करने में सहायता करता है. गुनगुने पानी में इसे मिलाकर समस्त घावों पर इस घोल को हलके कपडे से सेकें. इससे काफ़ी राहत प्राप्त होगी.
  5. ओटमील : ओटमील बात की सहायता से भी रोगी को जलन और खुजली से राहत प्राप्त होती है. 2 कप ओटमील को अच्छे से पीस लें. इसे गुनगुने पानी में मिला कर इस मिश्रण का प्रयोग रोगी के घावो पर करें. रोगी के नहाने के पानी में भी इसे मिलाया जा सकता है.
चिकन पॉक्स डाइट (Chicken Pox Diet)
इस रोग के रोगी को खाने में कई तरह के परहेज करने की आवश्यकता होता है. इस समय रोगी को विटामिन ए, जिंक, कैल्शियम, मैग्नीशियम आदि तत्वों की काफ़ी आवश्यकता होती है. अतः इसकी भरपाई करने के लिए नियमित डाइट देने की आवश्यकता होती है. इसके लिए विशेष डाइट का वर्णन नीचे किया जा रहा है,
  • रोगी के डाइट में केला, चावल, सेव, टोस्ट आदि चीजें दी जा सकती हैं. ये सभी चीज़ें पौष्टिकता से भरपूर होती हैं. केला और सेव का स्वाद मीठा होता है. इस समय रोगी के मुँह में कडवाहट होती है, अतः रोगी को यह अच्छा लगता है.
  • नारियल पानी भी इस समय रोगी को नियमित रूप से दिया जा सकता है. नारियल पानी में कई महत्वपूर्ण मिनिरल पाए जाते हैं, साथ ही यह जीरो कैलोरी डाइट है. इसके सेवन से रोगी के शरीर में निकले घावों की जलन कम होती है.
  • इस समय रोगी को उबली हुई सब्ज़ियाँ खिलाने की आवश्यकता होती है. गाजर, मीठा आलू, बीन, बन्दा गोभी आदि सब्जियों को उबाल कर इसका सेवन रोगी को कराने से रोगी के स्वास्थ्य को काफ़ी लाभ पहुँचता है.
  • दही का सेवन ऐसे रोग में काफ़ी लाभ पहुंचता है. ध्यान देने वाली बात है की ऐसे रोगों में दही त्वचा सम्बंधित परेशानियां कम करने में काफ़ी मदद करता है. साथ ही रोगी दिन भर में जितनी बार चाहे दही खा सकता है.
  • क्या न खाएं : इस समय रोगी को अंडा, मीट, तैलीय और मसालेदार खाने से बचने की ज़रुरत होती है. अतः इस समय बाजारी चीज़ें भी न खाना ही बेहतर होता है. जितना अधिक हो सके केवल उबली हुई चीज़ें अथवा प्राकृतिक चीज़ों का ही सेवन करें.

चिकन पॉक्स का दाग़ कैसे हटायें  (Chicken Pox Spot Removal Home Remedies in hindi)

रोग पूरी तरह से समाप्त हो जाने के बाद भी इस समय हुए घावों का दाग़ पूरे शरीर पर रह जाता है. यह दाग़ देखने में काफ़ी भद्दा होता है, जो सुन्दर लोगों को भी कुरूप बना देता है. इस दाग़ को हटाने के उपचार का वर्णन नीचे किया जा रहा है.
  • मधु : मधु के प्रयोग से चिकन पॉक्स के दाग़ से छुटकारा प्राप्त हो सकता है. शुद्ध मधु यदि दाग़ वाले स्थान पर समय समय पर लगाया जाता रहे तो, धीरे धीरे दाग़ कम होने लगता है.
  • अलोवेरा : अलोवेरा की सहायता से भी यह दाग़ जा सकता है. इसके लिए एलोवेरा का पत्ता तोड़ कर उसका जेल निकालें और उसे चिकन पॉक्स के दाग़ों पर लगाएं. इसके बाद इसे सूखने तक ऐसे ही छोड़ दें. प्रतिदिन लगभग 2 से 3 बार ऐसा करने से दाग़ जाने लगते हैं. एलोवेरा के पत्ते और जूस के फ़ायदे यहाँ पढ़ें.
  • नीबू का प्रयोग : लेमन जूस की सहायता से भी इन दाग़ों से छुटकारा पाने में मदद प्राप्त हो सकती है. किसी रुई में इसे लेकर शरीर के उन स्थानों पर लगाए और रगड़ें जहाँ पर दाग़ के निशान हैं. इसके बाद 15 मिनट तक ऐसे ही छोड़ दें. 15 मिनट के बाद इसे धो लें. ऐसा तब तक करें जब तक दाग़ पूरी तरह से चला न जाए.
  • कोकोआ बटर : इसके लेप से भी चिकन पॉक्स के अनचाहे दाग़ से छुटकारा प्राप्त हो सकता है. आपको इसका लाभ पाने के लिए रोज़ 3 से 4 बार अपने शरीर के दागयुक्त स्थानों पर इसका लेप करना होगा.
  • कोकोनट आयल : एक्स्ट्रा वर्जिन कोकोनट आयल की सहायता से भी दाग़ से मुक्ति का उपचार प्राप्त होता है. इसे दिन भर में 3 से 4 बार अपने पूरे शरीर पर मालिश करें, धीरे धीरे दाग़ मिटने लगता है.
  •  टमाटर का उपयोग: टमाटर विटामिन E से भरपूर होता है. हमें इन दागों को मिटाने के लिए विटामिन E से युक्त भोजन ज्यादा से ज्यादा खाना चाहिए जैसे टमाटर, हेज़ल नट्स आदि. टमाटर के पल्प को आप दाग में लगायें, थोड़ी देर बाद इसे पानी से धो लें. टमाटर काले धब्बे हटाने में बहुत सहायक होता है.इसके अलावा आप टमाटर के रस में नीबू का रस मिला कर लगायें. ये भी चेचक के दाग में बहुत फायेदेमंद है.
  • लहसुन का उपयोग : लहसून का रस निकाल लें. अब इसे दिन में कई बार दाग पर लगायें. जल्दी आपको परिणाम मिलेगा.
  • दूध का उपयोग : अपनी स्किन को जब भी धोएं तो पानी की जगह ठन्डे दूध का इस्तेमाल करें.
  • Tea Tree आयल का उपयोग : यह आयल बाजार में आसानी से मिल जाता है. चेचक के दाग मिटने में यह बहुत असरदार होता है. इसे दिन में कई बार दाग में लगायें आपके दाग जल्दी ही गायब होने लगेंगे.
  • चन्दन का उपयोग: चन्दन तो सौन्दर्य का प्रसाधन है. यह हमारी स्किन के लिए बहुत अच्छा होता है. इसे लगाने से चेचक के दाग भी मिट जाते है. चन्दन पाउडर में थोडा सा ओलिव आयल मिलाएं और इसे दाग पर लगायें. रोज ऐसा करने से आपको बहुत जल्दी और अच्छे परिणाम मिलेंगे.
  • बेकिंग सोडा का उपयोग : बेकिंग सोडा स्किन के ph लेवल को control करता है. इसे लगाने से खुजली की समस्या भी हल होती है. 2 tbsp बेकिंग सोडा में पानी मिलाकर पेस्ट बनायें. अब इसे दाग में स्क्रब की तरह लगायें और 1-2 मसाज करें. फिर इसे पानी से धो लें.
  •  पपीता का उपयोग : पपीता स्किन से dead सेल्स निकाल देता है जिससे ड्राई स्किन निकल जाती है और स्किन में moisture रहता है. 1 कप पपीता लें उसमें 5 tbsp शक्कर डालें फिर उसमें 5 tbsp दूध डालें. सभी को मिक्सी में पीस कर पेस्ट बना लें. अब इस पेस्ट को दाग पर लगायें और 15-20 लगे रहने दें. फिर पानी से साफ कर लें.
  • नारियल तेल का उपयोग: नारियल तेल इस तरह के दाग धब्बे निकालने में बहुत सहायक होता है. नारियल तेल को दाग पर लगायें और मसाज करें. ऐसा दिन में 4-5 बार करें. आपको परिणाम जरुर मिलेगा.

वेट लॉस ही नहीं बीपी और डायबिटीज में भी फायदेमंद है यह फल, जानें इसके ये 15 लाभ

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एक बहुत बड़ा और काफी स्वादिष्ट फल है, जो कई सारे गुणों का खजाना है। इसे खाने से वेट लॉस के साथ ही शुगर और ब्लड प्रेशर में भी राहत मिलती है। यह ट्रॉपिकल क्षेत्रों में खासतौर से पाया जाता है। आइए हम आपको फल का नाम भी बता देते हैं। यह लसदार फल और कुछ नहीं कटहल है। कटहल को अंग्रेजी में jackfruit कहते हैं। बड़े पैमाने पर इसकी सब्जी, कोफ्ता, कबाब, अचार बनाते हैं और इसे फल की तरह भी खाया जा सकता है। 

कटहल का वानस्पतिक नाम आर्टोकार्पस हेटेरोफिल्लस है। इसमें कई महत्वपूर्ण कार्बोहाइड्रेट के अलावा कई विटामिन भी पाए जाते हैं। कटहल का इस्तेमाल कई बीमारियों में किया जाता है। आइए जानते हैं इसके फायदे भी 

कटहल की पत्तियों की राख अल्सर के इलाज के लिए बहुत उपयोगी होती है। इसकी ताजा हरी पत्तियों को साफ धोकर सुखा लें और उसका चूर्ण तैयार कर लें। पेट के अल्सर में इस चूर्ण को खाने से काफी आराम मिलता है।

मुंह में छाले होने पर कटहल की कच्ची पत्तियों को चबाकर थूक देना चाहिए। यह छालों को ठीक कर देता है।
पके हुए कटहल के गूदे को अच्छी तरह से मैश करके पानी में उबाल लें। इस मिश्रण को ठंडा कर एक गिलास पीने से जबरदस्त स्फूर्ति आती है। यही मिश्रण यदि अपच के शिकार रोगी को दिया जाए तो उसे फायदा मिलता है।

डायबिटीज में कटहल की पत्तियों के रस का सेवन काफी फायदेमंद रहता है। यह रस हाई ब्लडप्रेशर के रोगियों के लिए भी उत्तम है। 

इसके छिलकों से निकलने वाला दूध यदि गांठनुमा सूजन, घाव और कटे-फटे अंगों पर लगाया जाए तो आराम मिलता है। इसके दूध से जोड़ों पर मालिश करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है।

कटहल के पे़ड की ताजी कोमल पत्तियों को कूट कर छोटी-छोटी गोली बना लें। इससे गले के रोगों में फायदा होता है। 

पके कटहल का सेवन करने से पेट साफ होता है। साथ ही, अपच की समस्या का निवारण हो जाता है।
कटहल की जड़ अस्‍थमा के रोगियों के लिए लाभदायक मानी जाती है। इसे पानी के साथ उबाल कर बचा हुआ पानी छान कर पीने से अस्‍थमा को कंट्रोल किया जा सकता है।

थायराइड के लिए भी कटहल उत्तम है। इसमें मौजूद सूक्ष्म खनिज और कॉपर थायराइड चयापचय के लिए प्रभावशाली होता है। यहां तक कि  यह बैक्‍टेरियल और वाइरल इंफेक्‍शन से भी बचाता है।
कटहल में मौजूद मैग्‍नीशियम हड्डी में मजबूती लाता है और ऑस्‍टियोपोरोसिस की समस्‍या से बचाता है। 

पके हुए कटहल के पल्प को अच्छी तरह से मैश करके पानी में उबालकर पीने से ताजगी आती है। कटहल में विटामिन ए पाया जाता है जिससे आंखों की रोशनी बढ़ती है और त्वचा निखरती है।

कटहल में अच्छी मात्रा में पोटैशियम होता है, जो हमारे दिल की सेहत दुरुस्त रखने में अहम रोल अदा करता है। दरअसल पोटैशियम मांसपेशियों के कामकाज में सामंजस्य बनाने और उन्हें बरकरार रखने में मदद करता है। इसके साथ ही यह हमारी बॉडी में सोडियम के स्तर को भी नियंत्रित करता है, जो हमारी धमनियों को नुकसान पहुंचा सकता है। 

इसमें विटामिन C, A और एंटीऑक्सिडेंट भी काफी मात्रा में पाए जाते हैं। यही वजह है कि शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाने में कारगर रोल निभाता है। मजबूत इम्यूनिटी बीमारियों और इनफेक्शन को शरीर से दूर रखने में अहम रोल निभाती है।
यह उन लोगों के अच्छा विकल्प हो सकता है, जो अपना वजन घटाना चाहते हैं। इसमें फैट नहीं होता और कैलोरी भी काफी कम होती है। इसके साथ ही इसमें काफी मात्रा में पौष्टिक तत्व भी होते हैं। कटहल में प्रोटीन भी अच्छी मात्रा में होता है, जिससे पेट काफी देर तक भरा-भरा महसूस होता है।

कटहल के बीज का चूरन बना कर उसमें थोड़ा शहद मिलाकर चेहरे पर लगाने से चेहरे के दाग-धब्बे मिट जाते हैं। जिन लोगों की चेहरा रुखा और बेजान होता है उन लोगों को कटहल का रस अपने चेहरे पर लगाना चाहिए। इसकी मसाज तब तक करे जब तक यह सूख न जाए फिर थोड़ी देर के बाद अपना चेहरा पानी के साथ धो लें। झुर्रियों से निजात पाने के लिए कटहल का पेस्ट बना कर और उसमें एक चम्मच दूध मिलाकर धीरे-धीरे चेहरे पर लगाना चाहिए। फिर गुलाब जल या ठंडे पानी से चेहरा साफ कर लें। नियमित रूप से ऐसा करने से चेहरे की झूर्रियों से छुटकारा मिल जाता है।

Sunday, 9 June 2019

काजू का सेवन आपके हृदय के लिए है लाभकारी, जाने काजू के फायदे

भारतीय समाज में जब भी सेहत की बात आती है, तो बड़े-बुजुर्ग काजू-बादाम (Cashew nut) खाने की सलाह देते हैं और यह बात काफी हद तक सही भी है। काजू न सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि कई रोगों से भी बचाता है। काजू का प्रयोग हमेशा से भारतीय किंचन में किया जाता रहा है। यह न सिर्फ भोजन के स्वाद को बढ़ाता है बल्कि इसे स्वास्थ्य (Health) के लिहाज से भी बेहतर माना जाता रहा है। इसमें ऐसे कई पोषक तत्व होते हैं, जो मेटाबोलिज्म को बेहतर बनाते हैं और हृदय रोगों के खतरे को भी कम करते हैं, जिससे हृदय स्वस्थ (Healthy heart) रहता है।
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 ये हैं इसके फायदे 

हृदय को रखता है स्वस्थ :- इसमें स्वास्थ्य के लिए अच्छे फैट क्री प्रचुर मात्रा होती है और कोलेस्ट्रॉल नगण्य होता है। इससे ब्लड कोलेस्ट्रॉल कम होता है और ट्राइग्लिसराइड हदय को स्वस्थ बनाते हैं। कुछ लोग यह मानते हैं कि फैट कम लेने से शरीर स्वस्थ रहता है, जबकि यह सही नहीं है। हमारे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हर प्रकार के पोषक तत्वों की जरूरत पड़ती है और फैट भी उनमें से एक है। लेकिन फैट स्वास्थ्यवर्धक स्रोतों से आना चाहिए। काजू भी फैट का एक स्वास्थ्यवर्धक स्रोत है।

शरीर को बनाता है मजबूत:- इसमें मैग्रीशियम होता है जो हड्डियों को मजबूत बनाता है, मांसपेशियों और नर्व की कार्यप्रणाली को सही रखता है. कैल्सियम को हड्डियों में सही प्रकार से अवशोषित करने के लिए हमारे शरीर को लगभग 300-750 मिलीग्राम मैरनीशियम की जरूरत होती है। 

ब्लड प्रेशर को करता है कंट्रोल:- काजू में सोडियम कम और पोटैशियम अधिक होता है, जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखता है। यदि शरीर में सोडियम की मात्रा अधिक होती हैं तो शरीर को पानी की जरूरत भी अधिक पड़ती है। इससे ब्लड की मात्रा भी बढ़ती है और ब्लड प्रेशर भी बढ़ता है। 

कैंसर का खतरा होता है कम:- काजू में सेलेनियम और विटामिन इ जैसे एंटी ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो शरीर को फ्री रैडिकल्स से बचते हैं। इससे इम्युनिटी बढ़ती है और कैंसर का खतरा कम होता है। इसमें जिंक भी होता है, जो इंफेक्शन से बचाया है। 

शारीरिक प्रक्रियाओं को रखता है सही:- इसमें कॉपर की उपयुक्त मात्रा होती है। यह एंजाइम की सक्रियता, हॉर्मोन के निर्माण, ब्रेन फंक्शन को सही रखने में सहायता करता है। 

किन्हें नहीं खाना चाहिए
इसे कोई भी खा सकता है लेकिन जिन्हें इससे एलर्जी हो या माइग्रेन की समस्या हो उम्हें इससे बचना चाहिए इसमे काफी केलोरी होती है जो वजन बढ़ा सकता है। अतः मोटे लोगों को भी इसे खाने से बचना चाहिए। यदि किसी को काजू से एलर्जी हो, तो इससे उल्टी, डायरिया, स्किन रैशेज और सांस लेने में परेशानी हो सकती है यदि ऐसी समस्या होती है तो इसे खाना छोड़ दें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें ।

Monday, 29 April 2019

रक्तचाप (Blood pressure) को सामान्य कैसे बनाये रखें

वर्तमान में जीवनशैली में परिवर्तन और अनियमित खान-पान के कारण हृदय रोगों की समस्या बढ़ गयी है। कुछ घरेलू उपायों से आप अपने हृदय को स्वथ्य रख सकते हैं तथा रोगों को दूर रखा जा सकता है। 


  • छोटी इलायची और पिपरामूल का चूर्ण घी के साथ सेवन करने से हृदय रोग में फायदा होता है। 
  • एक चम्मच शहद रोज खाने से हृदय मजबूत होता है। 
  • सुबह में अंगूर खाली पेट खाने से मधुमेह और बीपी की समस्या दूर होती है। हृदय भी स्वस्थ रहता है। 
  • गुड़ व घी मिला कर खाने से हृदय मजबूत होता है। 
  • अलसी के पत्ते और सूखे धनिये का क्वाथ बना कर पीने से हृदय की दुर्बलता एमआईटी जाती है। 
  • निम्न रक्तचाप में गाजर के रस में शहद मिला कर पीएं। 
  • उच्च रक्तचाप में सिर्फ गाजर का रस पीने से रक्तचाप संतुलित हो जाता है। 
  • सर्पगंधा को कूट कर रख लें। सुबह-शाम 2-2 ग्राम खाने से बढ़ा हुआ रक्तचाप सामान्य हो जाता है। 
  • प्रतिदिन लहसुन की कच्ची कली खाने से रक्तचाप सामान्य रहता है। 

Sunday, 14 April 2019

लंग कैंसर के इन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज, तुरंत कराएं इलाज

आजकल की युवा पीढ़ी के शोक बहुत ही अलग और निराले है। जी आजकल के युवा लोग नशे के शिकार हो रहे है।हमारे शरीर में लंग का बहुत महत्व होता है। कई बार लंग में विभिन्न कारणों से संक्रमण हो जाता है। कभी-कभी आगे चलकर यही संक्रमण ठीक से इलाज न मिलने के कारण कैंसर का रूप ले लेता है। कई बार देखा गया है कि कैंसर लंग से शुरू होकर अन्य अंगों में फैल जाता है। अधिकतर मामलों लंग का कैंसर वायुमार्गों में शुरू होता है। दुनिया में होने वाले कैंसरों में सबसे अधिक लंग कैंसर रोगी ही होते है। इन लक्षणों के दिखने पर डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।


लंग कैंसर के लक्षण 
# लंग कैंसर में चेहरे और गले में अचानक सूजन आ जाती है। इसके अलावा चेहरे और गले में अन्य कोई बदलाव दिखे तो इस पर ध्यान देना चाहिए।
# यदि लंबे समय के साथ खांसी हो रही हो और साथ में सीने में दर्द, बलगम में खून आ रहा है तो लंग कैंसर के लक्षण होता है।
# लंग कैंसर में आपको सांस लेने में दिक्कत होती है। इसके अलावा सांस लेते समय घबराहट होना भी इसका लक्षण है।
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# जोड़ों, पीठ, कमर और शरीर के अन्य भागों में दर्द लंग कैंसर की ओर इशारा करता है। इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
# लंग कैंसर में लगातार थकान बनी रहती है। इसके साथ ही थोड़ा सा चलने पर ही सांस फूलने लगती है।
# भूख न लगना भी लंग कैंसर होने का संकेत है। इस कराण से वजन भी घटने लगता है।

लंग कैसर के कारण 
1- धूम्रपान करना
2- वायु प्रदूषण
3- आनुवांशिक कारण
4- रेडॉन गैस
5- एस्बेस्टस

बचाव- धूम्रपान करने से लंग कैंसर का ख‍तरा सबसे ज्‍यादा रहता है। इसके अलावा इन सभी कारणों से लंग कैंसर हो सकता है। लंग कैंसर से बचने के लिए इनसे दूरी बनानी पड़ेगी।

अगर आप भी करते है इन 3 चीजों का सेवन तो बन बैठे है अपनी ही किडनी के दुश्मन, जाने सच्चाई

आज हम आपको शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग किडनी के बारे में कुछ खास बातें बताने वाले हैं| वर्तमान में लोग कई बुरी आदतों की शिकार हो गए हैं, जिसकी वजह से इनकी किडनी खराब हो जाती है| किडनी खराब होने से हमारे शरीर में मौजूद रक्त शुद्ध नहीं हो पाता| 


ऐसे में कई प्रकार की बीमारियां भी शरीर पर हावी हो जाती है| आज वर्तमान में उन लोगों की ही किडनी खराब नहीं होती जो शराब एवं धूम्रपान का अधिक सेवन करते हैं, बल्कि उन लोगों की भी किडनी खराब हो जाती है जो कुछ ऐसी चीजों का सेवन करते हैं जो उनके रूटीन में| यह चीजें धीरे-धीरे किडनी को अंदर से पूरी तरह खराब कर देती है, तो चलिए जानते हैं उन चीजों के बारे में जिनका सेवन नहीं करना चाहिए|
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 मांस दुनिया में काफी लोग हैं जो मांस मच्छी खाते हैं| हालांकि यह शरीर को उपर्युक्त मात्रा में प्रोटीन देता है| अगर हम मांस का सेवन एक निश्चित मात्रा में करे तो यह हमारे शरीर के लिए लाभदायक है| अगर हम मांस का सेवन अधिक मात्रा में कर रहे हैं, यहां तक कि प्रत्येक दिन कर रहे हैं तो इससे हमारी किडनी पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है| इसलिए हमें मांस मच्छी को सिमित मात्रा में खाना चाहिए| 

जंक फूडबदलते जमाने के साथ लोगों को घर का खाना कम ही पसंद आता है| ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लोग बाहर का खाना ज्यादा पसंद करते हैं| आज अधिकतर लोगों को तली हुई चीज खाने का काफी शौक हो गया है| ऐसा खाना अगर हम रोज खाते हैं, तो इससे किडनी पर काफी गलत प्रभाव पड़ता है| फूड में अधिक मात्रा में सोडियम और फास्फोरस पाया जाता है| इसलिए जंक फ़ूड का सिमित मात्रा में ही सेवन करे| 

स्मोकिंग आज के जमाने में स्मोकिंग करना काफी आम बात हो गई है| स्मोकिंग करने में लड़के ही नहीं बल्कि लड़कियां भी काफी आगे है| जो लोग स्मोकिंग करते हैं उनके हृदय की गति तेज हो जाती है, साथ ही खून का प्रवाह कम हो जाता है| जो लोग लगातार स्मोकिंग करते हैं उनकी किडनी जल्दी खराब होने का खतरा रहता है| अगर आप भी स्मोकिंग करते हैं तो आज ही स्मोकिंग से दूरी बना ले वर्ना बाद में आपको पछताना पड़ सकता है|

Tuesday, 19 March 2019

प्रेगनेंसी के बाद घी खाना चाहिए या नहीं, जानिए सही जवाब एक बार जरूर पढ़ें



प्रेगनेंसी के पहले और बाद में दोनों ही स्थिति में महिलाओं की सेहत का बहुत ख्याल रखना पड़ता है. प्रेगनेंसी के दौरान जहां दूध, फल और प्रोटीन ज्यादा लेने की सलाह दी जाती है. क्योंकि महिला का खान पान पौष्टिक तत्वों से भरा हुआ हो तो महिला के साथ- साथ उसका बच्चा भी स्वस्थ रहता है. महिला के स्वास्थ्य पर ही बच्चे का स्वास्थ्य निर्भर करता है. जिस तरह का महिला खाना खाती है. उसके दूध में भी उसी तरह का पौष्टिक तत्व मिलता है तो आज हम प्रेगनेंसी के बाद भी खाना चाहिए या नहीं. इसके बारे में बताने जा रहे हैं.

आपको बताते चलें कि दूध, घी का सेवन स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद होता है. गाय का घी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होने के कारण बहुत से लोग भी खाने की सलाह देते हैं.

प्रेगनेंसी के बाद भी खाना चाहिए या नहीं, जानिए सही जवाब-

* घी में वेजिटेबल आयल की तुलना में अधिक पोषक तत्व मौजूद होते हैं. इस कारण प्रतिदिन घी का सेवन करना चाहिए. ऑलिव आयल के बाद ही स्वास्थ्य के लिए काफी लाभदायक होता है. हालांकि भी का अधिक सेवन करना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है.
* प्रसव के बाद महिलाओं को अधिक कैलोरी वाला भोजन करने से बचना चाहिए. खासकर अधिक तैलीय पदार्थों का तो सेवन बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए. लेकिन प्रसव के बाद महिलाओं को स्वास्थ्य के लिए अच्छा भोजन अति आवश्यक होता है क्योंकि गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

 जिससे उनके शरीर में कई तरह के तत्वों की कमी हो जाती है. इसलिए उन्हें घी का सेवन प्रसव के बाद करना फायदेमंद होता है.
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घी खाने के फायदे-

1 .प्रसव के बाद महिलाओं की जोड़ों में चिकनाई की कमी हो जाती है. इसलिए कैल्शियम युक्त भोजन का सेवन करना चाहिए. घी से बने इन खाद पदार्थों से अधिक मात्रा में पोषक तत्व प्राप्त होती है. जिसे उनके जोड़ों की चिकनाई को पूरा करने में मदद मिलती है.
2 .जो महिलाएं माइग्रेन दर्द से परेशान रहती हैं. उन्हें प्रसव के बाद भी का जरूर सेवन करना चाहिए.
3 .गर्भावस्था से लेकर प्रसव तक होने वाले कमजोरी से बचने के लिए प्रसव के बाद उन्हें घी का सेवन जरूर करना चाहिए.
4 .घी का सेवन महिलाओं में चयापचय प्रक्रिया को बढ़ाता है.
5 .घी प्रसव के बाद शरीर में होने वाली सूजन को भी नियंत्रित करने में मददगार होता है.
6 .प्रसव के बाद अधिकतर महिलाएं कब से परेशान रहती हैं और घी का सेवन पेट के लिए अच्छा होता है. इससे कब्ज की समस्या दूर हो जाती है.

इसलिए प्रसव के बाद महिलाओं को घी का सेवन करना फायदेमंद होता है.
घी का सेवन कैसे करें-

अगर आप शरीर में घी का सकारात्मक प्रभाव देखना चाहती है तो प्रतिदिन एक गिलास गाय के दूध में एक चम्मच गाय का घी मिलाकर पिए. संतुलित आहार का सेवन करें और खाने के साथ हल की मात्रा में ही लें. अगर आपका वजन ज्यादा है तो ना लें.
नियमित और थोड़ी-थोड़ी मात्रा में घी का सेवन करने से आपको एनर्जी मिलती हैं. लेकिन जी का ज्यादा सेवन करने से आपका वजन बढ़ने लगता है और कोलेस्ट्रॉल की समस्या हो सकती है. इसलिए आप अपने स्वास्थ्य के अनुसार ही घी का सेवन करें.


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